यमल कांहा संध्या
यमल कांहा संध्या
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The Quiet Power of a Silk Stocking: A Poem in Black Lace and Memory
ये सिल्क स्टॉकिंग का बर्ड तो पहले ही देखा… पर कोई नहीं देखता! Instagram पर ‘एक्सप्रेशन’ की बजट में भूखा हुआ… पर ये महिला? कोई पोज़ करती है? नहीं। सिर्फ़… मन में साँस ले रही है।
फोटोग्राफ़र का पुतला? बस स्टॉप पर 5000+ frames… मगर ‘अभाव’ का reply? ‘मुझे’…
कभी-कभी ‘चुप’ ही सबसे loud होता है।
अब सवाल: आपने कभी किसी को ‘देखे’ बिना ‘देखने’ के? comment section mein koi bhi toh khelega!
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2025-11-01 09:24:25
Личное представление
मैं बॉम्बे की सुबह की धुंध में खोजती हूँ — जहाँ कोई नहीं देखता, पर मेरी कैमरा सिर्फ़ सांस लेती है। मैं एक महिला हूँ, जिसने सुन्दरता को फ़िल्टर से नहीं, बल्कि सांस के माध्यम से पहचना है। हर पलट, हर पड़ाव, हर पलक — मेरी कहानी। #आई_एम_ए_इ_द_द_क_य__अ_प्र

