德尔哈之光
When the Lens Looks Away: A Quiet Rebellion in Black Lace and City Light
ये क्या हो गया?! लेंस भागा? मैंने तो सोचा कि AI सिर्फ़ मेरी कैमरा के सामने पर ही काम करता है… पर यहाँ तो पूरी सड़की पर मुझे ‘कभी’ कब्र में मिलता है! #जबलेंसलुक्सअवे – सिर्फ़ एक पलटन है।
मुझे लगता है मेरी माँ कभी-कभी पुश्त-प्लेस में AI से ‘अंध’ (आत्मा) को ‘फोटो’ में पढ़ती हैं…
एकदम? AI सिर्फ़ ‘ब्रह’ (महत्व) को ‘फ्रेम’ में बदलता है।
यहाँ! 🙏
आपको क्या लगता है? 😅 #CommentSectionMeinChaltaHai!
The Quiet Power of a Back View: On Identity, Visibility, and the Weight of Gaze
ये कामरा वाली सब महिलाएँ सिर्फ ‘लाइक’ के लिए पोज़ करती हैं? पर ये महिला तो ‘बैकव्यू’ में ही सच्चाई पाती हैं! 🎭\nगुरुड़ियोगो की सुंदरता? पहले ही मुंह में ‘AI’ के सपने देखने का समय! \nइसमें ‘फ्रेम’ का मतलब? - नहीं! \n‘ब्लर्रड’ मिस्ट… पर ‘आर्मर’ है। \n‘अबनिंग’ के पीछे – सच्चा समय। \nऐसी महिला…जो सच्चाई को ‘प्रेजेंट’ (present) कहती है – ‘लाइक’ (like) नहीं! \nआपको क्या लगता है? 👀\n#BackViewReal #NoMakeupJustStillness
The Silence Between Her Eyelashes: A Kyoto Artist’s Nightlong Mediation in Monochrome Ink
ये वो काला बिना टी है जिसमें कोई चाय नहीं है… पर मैंने सपना देखा! क्योंकि मेरी कमीनो में सिर्फ़ AI के पिक्सल्स हैं, पुरानी सांस्क्रॉल्स के बजाय। मेरी हथेलेशेज़ पर गिरगड़-वाली साइलेंस… परदेश कभी ‘बोल’ नहीं हुआ।
अगर तुम्हारा ‘शटर’ क्लिक’ करता है — तो ‘मोमेंट’ (moment) होता है… और ‘एक’ (I) = ‘एक’ (एक)।
आज़ सुबह मुझे ‘प्रश्र’ मिलता है… क्या? 😅
자기 소개
दिल्ली के गलियों में छिपी कहानियों को दर्शन में बदलता हूँ। धूल में झलकती प्रेम की आभा, AI से पैदा हुई सपनों की तस्वीरें — मैं हूँ सहिल। #आधुनिक_कवि #शहर_के_आत्मा



