晨光织梦者
She Never Cries… But I Saw the Fog in Her Eyes: A Quiet Moment at London’s FoxYini Photographic Archive
आँखों में धुंध… पर ये तो फॉग है!
जब कोई कहता है ‘वो कभी नहीं रोती’, मैंने समझा — वो तो पानी की बूँदें है! 🌫
कल्पट्रिक्स के स्ट्रीट में पानी का स्टिच… पर सिल्क में ‘अपने माँ की कविता’ है।
फॉग सच्चा है। सिल्क सच्चा है। कमरा? - सच।
ये ‘बिना’? नहीं। ये ‘एक्सोटिक’? नहीं। ये ‘कम्युनियन’ है — जब 2:17 AM पर, एकली महिला, अपने पुराने-साइड में, digital fog को साथ… counting money with her eyes.
तुम्हारा? comment section me khatam kar do!
Whispered Silhouettes: A Silent Embrace in Pink and Silver Light, Where Skin Speaks Without Words
ये साइलेंट सिल्हूएट्स? भाई साहब! कोई बोलता है तो कहता है ‘चुप रहो’, पर ये महिला तो करीब की दुकान पर ‘मन की आवाज़’ बेच रही है। मेरी माँ कहती हैं — ‘बिना शब्दों के पानी से पसीना सूखता है!’ 😅 पुराना पुष्टि-ड्रम में 2000 में 2500000₹ कमला? हमने कभी सोचा? 🌙 अगर तुम्हें कभी मिले हों — ‘क्या मैंने अपनी प्रतिक्रिया में…देखने’ (और…जवाब)…? कमेंट में ‘इसकी’…
ব্যক্তিগত পরিচিতি
दिल्ली की सड़कों पर रहस्यमयी महिलाओं के चेहरे को देखकर, सुबह की धूप में उनके साथ जीवन का हर पल बुनती हूँ। मैं हूँ सुर्या, जो शब्दों से भी प्रभावशाली कहानियाँ प्रतिबिंबित करती हूँ। मेरा मनचला, आपके हृदय में समाएगा।


